विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (ISRO, NASA आदि)
Quick summary (मुख्य बिंदु)
- India Space Policy (2023) तथा नीतिगत सुधारों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई है — नतीजतन IN‑SPACe जैसी संस्थाओं और निजी स्टार्ट‑अप्स का विकास हुआ।
- Gaganyaan के लिए 2025 में बजट और परीक्षणों (जैसे पैराशूट और re‑entry परीक्षण) पर ध्यान दिया गया; कई subsystem परीक्षण पूरे हुए हैं।
- NASA का Artemis कार्यक्रम चंद्र अन्वेषण और दीर्घकालिक चंद्र उपस्थिति पर केन्द्रित है, और इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल है।
- Geospatial Policy (2022) व India Space Policy (2023) जैसे ढांचों ने डेटा उपयोग, लाइसेंसिंग और निजी उद्योग के लिए नियमों को सरल बनाया है।
विस्तृत नोट्स
1. परिचय — अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का महत्व
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संचार, नेविगेशन, मौसम/जलवायु निगरानी, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक गतिविधियों (जैसे कृषि‑मॉनिटरिंग और डेटा‑सेवा) में उपयोगी है। आधुनिक परिदृश्य Space 4.0 की ओर बढ़ रहा है — जहाँ निजी कंपनियाँ, छोटे सैटेलाइट और ऑन‑डिमांड सेवाएँ प्रमुख हैं।
2. ISRO — संगठन और उद्देश्य
ISRO (Indian Space Research Organisation) भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रमुख संस्था है। ISRO का ध्यान मिशन‑आधारित अनुसंधान, उपग्रह लॉन्च, अनुप्रयोग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर है। पिछले दशकों में ISRO ने कम लागत में सफल लॉन्च और उपग्रह बनाकर विश्वसनीयता दिखाई है; अब वह निजी साझेदारी को प्रोत्साहित कर रहा है।
3. प्रमुख भारतीय नीतिगत बदलाव (साल‑दर‑साल सार)
- Geospatial Policy 2022 — सरकारी और वाणिज्यिक उपयोग के लिए geospatial डेटा की पहुँच व उपयोग पर मार्गदर्शक सिद्धांत।
- India Space Policy 2023 — निजी सेक्टर को वैल्यू‑चेन के हर चरण में शामिल करने का लक्ष्य; लाइसेंसिंग और विनियमन को सरल बनाना।
- IN‑SPACe — Indian National Space Promotion and Authorisation Centre; यह निजी उद्यमों के लिए एक single‑window प्रमाणीकरण और परीक्षण सुविधा प्रदाता है।
4. 2025 के प्रमुख सुधार और घटनाक्रम — संक्षेप
2025 तक सरकार और नीति‑निर्माताओं का रुझान निजी भागीदारी, घरेलू विनिर्माण और लॉन्च‑क्षमता बढ़ाने की ओर रहा है। स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम को ग्रांट, टेस्ट‑बेड पहुँच और प्रशिक्षण से सहायता दी जा रही है।
5. Missions & Technologies
ISRO — प्रमुख मिशन (चालू / निकट भविष्य)
- Gaganyaan — भारत का मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम; 2025 में इसके लिए बजट और परीक्षण‑धारा पर ध्यान दिया गया और कई प्रमुख सबसिस्टम परीक्षण हो चुके हैं।
- भविष्य की योजनाएँ — भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों का रोडमैप और भविष्यमान मानव/चंद्र मिशनों के लिए तैयारी।
अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य (NASA और अन्य)
NASA का Artemis कार्यक्रम चंद्र सतत उपस्थिति और मानव‑चंद्र अन्वेषण के लिए है। Artemis Accords के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मानक और सहयोग स्थापित किए जा रहे हैं।
6. टेक्निकल बिंदु (उम्मीदवारों के लिये जरूरी)
- रॉकेट क्लासेस: SLV, ASLV, PSLV, GSLV (Mk‑II / Mk‑III) — भारी उपग्रहों के लिए cryogenic upper stages महत्त्वपूर्ण हैं।
- सैटेलाइट प्रकार: GEO, LEO, Polar, Smallsat, CubeSat, Constellations।
- एंड‑यूज़ सेवाएँ: Remote sensing (IRS श्रृंखला), Navigation (NavIC), Communication (GSAT श्रृंखला), Earth observation‑based analytics।
- डॉकिंग/रोबोटिक्स और सुरक्षा: crewed spacecraft docking तकनीक, life‑support systems, re‑entry/parachute systems (Gaganyaan परीक्षण)।
7. नीति‑परिणाम और अर्थव्यवस्था
नीति सुधारों के फलस्वरूप स्टार्ट‑अप्स, उपग्रह‑कंपोनेंट विनिर्माण, ग्राउंड‑स्टेशन सेवाएँ और डेटा‑आधारित व्यवसाय बढ़ रहे हैं। इससे अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में रोजगार व निवेश के अवसर बढ़ते हैं।
8. चुनौतियाँ और जोखिम
- Space debris और कक्षा‑भीड़ बढ़ना
- Dual‑use तकनीक और सुरक्षा‑नियमन
- स्थिर वित्तपोषण और घरेलू आपूर्ति‑शृंखला का विकास
- मानव मिशन के लिये जीवन‑समर्थन और सुरक्षित re‑entry प्रणालियों का पूर्ण सत्यापन
9. संक्षेप (Exam‑ready पॉइंट्स)
महत्वपूर्ण नीतियाँ: Geospatial Policy 2022; India Space Policy 2023; IN‑SPACe — इनका उद्देश्य निजी भागीदारी और डेटा‑उपयोग को नियंत्रित एवं प्रोत्साहित करना है। प्रमुख मिशन: Gaganyaan (मानव मिशन), Chandrayaan श्रृंखला (चंद्र अन्वेषण), PSLV/GSLV रॉकेट परिवार। 2025 अपडेट: Gaganyaan के परीक्षण‑दौर और संबंधित बजट आवंटन।
2025 के प्रमुख सुधार — सार
- India Space Policy 2023 का क्रियान्वयन — निजी सेक्टर को end‑to‑end भागीदारी के लिए प्रेरित करना और लाइसेंसिंग को सरल बनाना।
- IN‑SPACe की भूमिका — निजी संस्थाओं के लिए single‑window authorization और परीक्षण सुविधा।
- बजटीय समर्थन — Gaganyaan जैसे मानव मिशनों के लिए विशेष वित्तीय आवंटन और परीक्षण कार्यक्रम।
- स्टार्ट‑अप और विनिर्माण प्रोत्साहन — घरेलू कंपोनेंट निर्माण और निवेश सुविधाओं में सुधार।