अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय क्षेत्र

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Last Updated: 11/11/2025

अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय क्षेत्र (Fifth & Sixth Schedule) | Indian Polity Notes in Hindi

अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय क्षेत्र (Fifth & Sixth Schedule)

भारतीय संविधान में जनजातीय समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए पाँचवीं (Fifth) और छठी (Sixth) अनुसूची के तहत विशेष प्रावधान किए गए हैं। ये अनुसूचियाँ भारतीय संघ की “एकता में विविधता” की भावना को सशक्त बनाती हैं और जनजातीय समाज को अपनी परंपराओं के अनुसार शासन करने का अधिकार देती हैं।


पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) – अनुसूचित क्षेत्र

  • पाँचवीं अनुसूची का संबंध उन राज्यों से है जहाँ जनजातीय आबादी अधिक है लेकिन वे पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा नहीं हैं।
  • इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले राज्य — झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और गुजरात।
  • इसका उद्देश्य है — जनजातीय समुदायों के भूमि अधिकार, संस्कृति और शासन में उनकी भागीदारी की रक्षा करना।

प्रमुख विशेषताएँ (Features)

  • संविधान के अनुच्छेद 244(1) में पाँचवीं अनुसूची का उल्लेख है।
  • राज्यपाल को यह शक्ति दी गई है कि वह यह घोषित करे कि राज्य का कौन-सा क्षेत्र “अनुसूचित क्षेत्र” होगा।
  • राज्यपाल राष्ट्रपति को अनुसूचित क्षेत्रों की स्थिति के बारे में रिपोर्ट भेजता है।
  • राज्यपाल को इन क्षेत्रों में प्रशासनिक संशोधन करने की विशेष शक्ति प्राप्त है।
  • राज्यपाल की सहायता के लिए जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council – TAC) का गठन किया जाता है।

जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC)

  • राज्यपाल द्वारा गठित।
  • अधिकतम 20 सदस्य, जिनमें से 3/4 सदस्य राज्य विधानसभा के अनुसूचित जनजाति से चुने हुए सदस्य होते हैं।
  • इस परिषद का कार्य – जनजातीय मामलों से संबंधित नीतियों पर सलाह देना।
  • राज्यपाल परिषद की सलाह को स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।

राष्ट्रपति की शक्तियाँ

  • राष्ट्रपति किसी क्षेत्र को “अनुसूचित क्षेत्र” घोषित या निरस्त कर सकते हैं।
  • वह राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों की सीमाएँ बढ़ा या घटा सकते हैं।

छठी अनुसूची (Sixth Schedule) – जनजातीय क्षेत्र

  • छठी अनुसूची पूर्वोत्तर भारत के राज्यों — असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम पर लागू होती है।
  • इसका उद्देश्य इन राज्यों की विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और शासन प्रणाली की रक्षा करना है।
  • यह अनुसूची जनजातीय स्वशासन (Autonomous District Councils) का प्रावधान करती है।

स्वायत्त जिला परिषदें (Autonomous District Councils)

  • इन क्षेत्रों में स्थानीय शासन के लिए स्वायत्त परिषदें बनाई जाती हैं।
  • इन परिषदों को विधायी, कार्यकारी और न्यायिक शक्तियाँ दी गई हैं।
  • परिषदें भूमि, वन, कृषि, जल, संस्कृति, सामाजिक प्रथाओं, पारंपरिक न्याय आदि विषयों पर कानून बना सकती हैं।
  • इन परिषदों में अधिकतम 30 सदस्य होते हैं।
  • 5 सदस्य राज्यपाल द्वारा नामित किए जाते हैं।
  • इनकी अवधि 5 वर्ष होती है।

न्यायिक शक्तियाँ

  • परिषद अपने क्षेत्र में जनजातीय न्यायालय स्थापित कर सकती है।
  • इन न्यायालयों में जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार विवादों का निपटारा होता है।
  • राज्यपाल को इन न्यायालयों की निगरानी का अधिकार है।

वित्तीय शक्तियाँ

  • परिषद कर, शुल्क और भूमि राजस्व वसूल सकती है।
  • केंद्र और राज्य सरकार इन परिषदों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।

राज्यपाल की भूमिका

  • राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह परिषद के कानून को मंजूरी दे या अस्वीकार करे।
  • राज्यपाल परिषद के कार्यों की निगरानी करता है और उसे भंग भी कर सकता है।

पाँचवीं और छठी अनुसूची में अंतर

आधार पाँचवीं अनुसूची छठी अनुसूची
लागू राज्यझारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश आदिअसम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम
प्रावधानराज्यपाल और TAC द्वारा प्रशासनस्वायत्त परिषदों द्वारा स्वशासन
कानूनी स्थितिसीमित स्वायत्तताविधायी एवं न्यायिक स्वायत्तता
उद्देश्यजनजातीय प्रशासन में राज्य की भागीदारीजनजातीय क्षेत्रों में स्वशासन
संविधान अनुच्छेद244(1)244(2)

महत्व

  • जनजातीय समाज को अपने परंपरागत शासन में भागीदारी देता है।
  • सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करता है।
  • राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए स्थानीय स्वायत्तता सुनिश्चित करता है।
  • प्राकृतिक संसाधनों पर जनजातीय अधिकारों को मान्यता देता है।
  • संविधान के “सामाजिक न्याय” के सिद्धांत को मजबूत करता है।

निष्कर्ष

पाँचवीं और छठी अनुसूचियाँ भारतीय संविधान की जनकल्याणकारी और समावेशी भावना का प्रतीक हैं। इनसे यह सिद्ध होता है कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो विविधता के बावजूद एकता को कायम रखता है। इन क्षेत्रों में स्वशासन का यह मॉडल सहभागी लोकतंत्र की उत्कृष्ट मिसाल है।


40+ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions & Answers)

Q1: पाँचवीं अनुसूची किन राज्यों पर लागू होती है?
झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि पर।

Q2: छठी अनुसूची किन राज्यों पर लागू है?
असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम।

Q3: पाँचवीं अनुसूची का संबंध किस अनुच्छेद से है?
अनुच्छेद 244(1)।

Q4: छठी अनुसूची का संबंध किस अनुच्छेद से है?
अनुच्छेद 244(2)।

Q5: जनजातीय सलाहकार परिषद क्या है?
एक निकाय जो अनुसूचित जनजातियों से संबंधित मामलों पर राज्यपाल को सलाह देती है।

Q6: TAC में कितने सदस्य होते हैं?
अधिकतम 20।

Q7: TAC के 3/4 सदस्य कौन होते हैं?
राज्य विधानसभा के अनुसूचित जनजाति सदस्य।

Q8: अनुसूचित क्षेत्र कौन घोषित करता है?
राज्यपाल राष्ट्रपति की सहमति से।

Q9: जनजातीय क्षेत्रों में कानून लागू करने का अधिकार किसके पास है?
स्वायत्त परिषदों के पास।

Q10: स्वायत्त परिषदें कहाँ पाई जाती हैं?
छठी अनुसूची के तहत।

Q11: परिषद की अवधि कितनी होती है?
5 वर्ष।

Q12: परिषद में कितने सदस्य होते हैं?
अधिकतम 30 सदस्य।

Q13: परिषद के कितने सदस्य राज्यपाल द्वारा नामित किए जाते हैं?
5।

Q14: परिषदों के पास कौन-कौन सी शक्तियाँ हैं?
विधायी, कार्यकारी और न्यायिक।

Q15: कौन-सा राज्य पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है लेकिन छठी के अंतर्गत नहीं?
छत्तीसगढ़।

Q16: राष्ट्रपति अनुसूचित क्षेत्र की सीमा में परिवर्तन कर सकते हैं?
हाँ।

Q17: संविधान में पाँचवीं और छठी अनुसूचियाँ किस भाग में हैं?
भाग X।

Q18: पाँचवीं अनुसूची कब लागू हुई?
26 जनवरी 1950 से।

Q19: कौन-सा अनुच्छेद जनजातीय क्षेत्रों की रक्षा करता है?
अनुच्छेद 244।

Q20: पाँचवीं अनुसूची का उद्देश्य क्या है?
जनजातीय हितों की रक्षा और विकास।

Q21: छठी अनुसूची का उद्देश्य क्या है?
जनजातीय स्वशासन सुनिश्चित करना।

Q22: कौन-सा राज्य सबसे पहले पाँचवीं अनुसूची में जोड़ा गया?
मध्य प्रदेश।

Q23: कौन-सा राज्य सबसे पहले छठी अनुसूची में शामिल हुआ?
असम।

Q24: जनजातीय अदालतें कौन संचालित करती हैं?
स्वायत्त परिषदें।

Q25: कौन-सा अनुसूची मॉडल “Autonomous Councils” की व्यवस्था करता है?
छठी अनुसूची।

Q26: TAC की अध्यक्षता कौन करता है?
राज्यपाल।

Q27: अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिकार किसके पास हैं?
जनजातीय समुदायों के।

Q28: क्या पाँचवीं अनुसूची में न्यायिक स्वायत्तता है?
नहीं।

Q29: क्या छठी अनुसूची संविधान संशोधन द्वारा जोड़ी गई थी?
नहीं, यह मूल संविधान में ही थी।

Q30: क्या पाँचवीं और छठी अनुसूचियाँ समान हैं?
नहीं, पाँचवीं राज्य प्रशासनिक नियंत्रण में है, छठी स्वायत्त शासन मॉडल है।

Q31: कौन-सा क्षेत्र “Autonomous District” कहलाता है?
छठी अनुसूची के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्र।

Q32: TAC का मुख्य कार्य क्या है?
राज्यपाल को सलाह देना।

Q33: कौन-सा राज्य पाँचवीं अनुसूची में नहीं आता?
असम।

Q34: कौन-सा राज्य छठी अनुसूची में आता है?
मिजोरम।

Q35: कौन सा अनुच्छेद स्वायत्त परिषदों से संबंधित है?
अनुच्छेद 244(2)।

Q36: पाँचवीं अनुसूची का प्रशासन कौन करता है?
राज्यपाल।

Q37: छठी अनुसूची का प्रशासन कौन करता है?
स्वायत्त परिषदें और राज्यपाल।

Q38: TAC की बैठक कितनी बार होती है?
वर्ष में कम से कम दो बार।

Q39: पाँचवीं अनुसूची में संविधान संशोधन का अधिकार किसे है?
संसद को।

Q40: पाँचवीं और छठी अनुसूचियाँ किन उद्देश्यों को दर्शाती हैं?
जनजातीय संरक्षण, स्वशासन, सामाजिक न्याय और संघीय एकता।

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