संसद की समितियाँ (Parliamentary Committees of India)
भारतीय संसद में सभी विषयों पर खुली चर्चा और बहस संभव नहीं होती, क्योंकि समय सीमित होता है और विषय तकनीकी व जटिल होते हैं। इसी कारण संसद के कार्य को कुशलतापूर्वक संपन्न करने के लिए विभिन्न संसदीय समितियाँ (Parliamentary Committees) गठित की जाती हैं। ये समितियाँ संसद का “**बुद्धि केंद्र (Intellectual Arm)**” कहलाती हैं।
संविधानिक प्रावधान
संसदीय समितियों का प्रत्यक्ष उल्लेख संविधान में नहीं है, परंतु अनुच्छेद 118 के तहत संसद को अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन के लिए नियम बनाने का अधिकार है। इन्हीं नियमों के तहत समितियों का गठन होता है।
समितियों के प्रकार (Types of Parliamentary Committees)
भारतीय संसद की समितियों को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है:
- 1️⃣ स्थायी समितियाँ (Standing Committees)
- 2️⃣ अस्थायी समितियाँ (Ad-hoc Committees)
1. स्थायी समितियाँ (Standing Committees)
ये समितियाँ स्थायी होती हैं — यानी इनका गठन प्रत्येक सत्र में किया जाता है और ये निरंतर कार्य करती हैं। इनके अंतर्गत कई प्रकार की समितियाँ आती हैं:
(A) वित्तीय समितियाँ (Financial Committees)
संसद की सबसे प्रभावशाली समितियाँ वित्तीय समितियाँ होती हैं। इनमें तीन प्रमुख समितियाँ हैं:
1️⃣ लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)
- गठन: 1921 (Government of India Act, 1919 के तहत)
- सदस्य: कुल 22 — लोकसभा से 15, राज्यसभा से 7
- अध्यक्ष: लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त
- कार्य: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की जांच
- मुख्य उद्देश्य: सरकारी व्यय की वैधता, दक्षता और अर्थव्यवस्था की जांच।
2️⃣ प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)
- सदस्य: 30 (सभी लोकसभा से)
- अध्यक्ष: लोकसभा सदस्य
- कार्य: बजट की मांगों का विश्लेषण और सुधार के सुझाव देना।
- यह भविष्य के व्यय की योजना बनाती है।
3️⃣ लोक लेखा समिति (Public Undertakings Committee – CUP)
- सदस्य: 22 (लोकसभा 15, राज्यसभा 7)
- कार्य: सार्वजनिक उपक्रमों (Public Sector Undertakings) के कार्य की जांच।
- CAG की रिपोर्टों की समीक्षा करना।
(B) विभागीय स्थायी समितियाँ (Departmental Standing Committees)
- गठन: 1993 में (नरसिंह राव सरकार के समय)
- कुल समितियाँ: 24 (विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित)
- कार्य:
- मंत्रालयों की नीतियों की समीक्षा।
- मांग पत्रों और विधेयकों की जांच।
- नीतिगत सुधारों की सिफारिशें।
- लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते हैं।
(C) अन्य स्थायी समितियाँ
- संसदीय विशेषाधिकार समिति
- याचिका समिति (Petitions Committee)
- सदस्य आचार समिति (Committee on Ethics)
- नियम समिति (Rules Committee)
- प्रकाशन समिति (Committee on Publications)
- महिला सशक्तिकरण समिति
2. अस्थायी समितियाँ (Ad-hoc Committees)
ये समितियाँ किसी विशेष उद्देश्य के लिए अस्थायी रूप से गठित की जाती हैं और कार्य पूर्ण होने पर भंग हो जाती हैं। इनके दो प्रमुख प्रकार हैं:
(A) चयन समिति (Select Committee)
- किसी विशेष विधेयक की जांच के लिए गठित होती है।
- लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक सदन द्वारा गठित।
- कार्य पूर्ण होने के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत कर भंग हो जाती है।
(B) संयुक्त समिति (Joint Committee)
- दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनती है।
- किसी विशेष विधेयक या घोटाले की जांच के लिए गठित।
- उदाहरण: 2G स्पेक्ट्रम घोटाला संयुक्त समिति, Bofors घोटाला समिति।
संसदीय समितियों का महत्व
- संसद के कार्यभार को कम करती हैं।
- विशेषज्ञता आधारित निर्णय सुनिश्चित करती हैं।
- सरकारी नीतियों की जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं।
- पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देती हैं।
- कार्यपालिका पर प्रभावी नियंत्रण रखती हैं।
संसदीय समितियों की सीमाएँ
- इनकी रिपोर्टें बाध्यकारी नहीं होतीं।
- बैठकें गोपनीय होती हैं।
- कार्यपालिका का हस्तक्षेप कभी-कभी प्रभाव डालता है।
- राजनीतिक दृष्टिकोण कभी-कभी निष्पक्षता को प्रभावित करता है।
निष्कर्ष
संसदीय समितियाँ भारतीय लोकतंत्र का “मौन प्रहरी” हैं। ये सदन की “विचारशाला” के रूप में कार्य करती हैं, जहाँ राजनीति से ऊपर उठकर नीति और प्रशासन की गहराई से समीक्षा की जाती है। इनके माध्यम से संसद की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और जनता के प्रति उत्तरदायित्व कायम रहता है।
40 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)
Q1: संसदीय समितियों का उल्लेख संविधान में कहाँ है?
प्रत्यक्ष रूप से नहीं, परंतु अनुच्छेद 118 में अप्रत्यक्ष रूप से।
Q2: संसदीय समितियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
दो – स्थायी और अस्थायी।
Q3: लोक लेखा समिति कब बनी?
1921 में।
Q4: लोक लेखा समिति का मुख्य कार्य क्या है?
CAG की रिपोर्टों की जांच।
Q5: प्राक्कलन समिति के सदस्य कितने होते हैं?
30 (सभी लोकसभा से)।
Q6: लोक लेखा समिति के सदस्य कितने हैं?
22 (लोकसभा 15, राज्यसभा 7)।
Q7: सार्वजनिक उपक्रम समिति किसकी जांच करती है?
Public Sector Undertakings की।
Q8: विभागीय स्थायी समितियों की संख्या कितनी है?
24।
Q9: विभागीय स्थायी समितियाँ कब बनीं?
1993 में।
Q10: संयुक्त समिति किन परिस्थितियों में गठित होती है?
किसी विशेष विधेयक या घोटाले की जांच के लिए।
Q11: संयुक्त समिति में कौन-कौन से सदस्य होते हैं?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य।
Q12: क्या संसदीय समितियों की रिपोर्ट बाध्यकारी होती है?
नहीं।
Q13: कौन सी समिति मनी बिल की समीक्षा करती है?
वित्त समिति।
Q14: कौन-सी समिति लोकसभा अध्यक्ष के अधीन होती है?
लोक लेखा समिति।
Q15: PAC का गठन किस अधिनियम के तहत हुआ?
Government of India Act, 1919।
Q16: Estimates Committee का कार्य क्या है?
बजट की मांगों का विश्लेषण और सुधार के सुझाव।
Q17: कौन-सी समिति स्थायी नहीं होती?
Ad-hoc समिति।
Q18: संसदीय विशेषाधिकार समिति क्या करती है?
सांसदों के विशेषाधिकार से जुड़े मामलों की जांच।
Q19: याचिका समिति का कार्य?
जनता द्वारा संसद को भेजी गई याचिकाओं की जांच।
Q20: कौन-सी समिति संसद की नैतिकता से जुड़ी है?
सदस्य आचार समिति।
Q21: क्या PAC की अध्यक्षता सत्तारूढ़ दल करता है?
नहीं, विपक्षी दल का सदस्य करता है।
Q22: कौन-सी समिति राष्ट्रपति की अनुशंसा से बनती है?
कोई नहीं, सभी संसद द्वारा गठित होती हैं।
Q23: क्या समितियों की बैठकें सार्वजनिक होती हैं?
नहीं, गोपनीय होती हैं।
Q24: समिति रिपोर्ट संसद में कौन प्रस्तुत करता है?
समिति का अध्यक्ष।
Q25: समिति की रिपोर्ट का उद्देश्य क्या है?
सरकार की कार्यप्रणाली सुधारना।
Q26: विभागीय स्थायी समितियों की अध्यक्षता कौन करता है?
लोकसभा सदस्य।
Q27: Estimates Committee कितनी बार रिपोर्ट देती है?
हर वर्ष।
Q28: कौन-सी समिति राज्यसभा में नहीं होती?
प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)।
Q29: संसद की “Eyes and Ears” किसे कहा जाता है?
संसदीय समितियाँ।
Q30: कौन-सी समिति संसद की “मिनी संसद” कहलाती है?
विभागीय स्थायी समिति।
Q31: Public Accounts Committee की रिपोर्ट किसे भेजी जाती है?
लोकसभा अध्यक्ष को।
Q32: महिला सशक्तिकरण समिति का गठन कब हुआ?
1997 में।
Q33: कौन-सी समिति संसद की पुस्तकों और रिपोर्टों से संबंधित है?
प्रकाशन समिति।
Q34: कौन-सी समिति सदस्य अनुशासन की जांच करती है?
Ethics Committee।
Q35: क्या समितियाँ न्यायिक शक्ति रखती हैं?
नहीं।
Q36: संसदीय समितियों का मुख्य लाभ क्या है?
विशेषज्ञता और निष्पक्ष विश्लेषण।
Q37: समितियों की अनुशंसाएँ किसके लिए मार्गदर्शक होती हैं?
सरकार और संसद दोनों के लिए।
Q38: कौन तय करता है समिति के सदस्य?
लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति।
Q39: समिति का कार्यकाल कितना होता है?
आमतौर पर एक वर्ष।
Q40: संसदीय समितियों का सार क्या है?
विचार, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही।