धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार

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Last Updated: 9/11/2025

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) | अनुच्छेद 25 से 28 | Indian Polity Notes in Hindi

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion – अनुच्छेद 25 से 28)

भारत का संविधान अपने नागरिकों को धर्म के संबंध में **पूर्ण स्वतंत्रता (Freedom of Conscience and Religion)** प्रदान करता है। यह अधिकार भारतीय धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है, जो कहता है कि — “राज्य किसी धर्म विशेष को न तो समर्थन देगा और न ही विरोध।” प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार करने का अधिकार है।


अनुच्छेद 25 – अंत:करण की स्वतंत्रता और धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार

अनुच्छेद 25(1) कहता है — “प्रत्येक व्यक्ति को अंत:करण की स्वतंत्रता तथा धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन, प्रचार और प्रसार करने का समान अधिकार है।” यह सभी व्यक्तियों (citizens + non-citizens) पर लागू होता है।

इसमें चार प्रमुख अधिकार शामिल हैं:

  • धार्मिक अंत:करण की स्वतंत्रता (Freedom of Conscience)
  • धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन (Free Profession)
  • धर्म का प्रचार (Propagation)
  • धर्म का प्रसार (Dissemination)

उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions)

राज्य इन स्वतंत्रताओं पर निम्न कारणों से प्रतिबंध लगा सकता है —

  • सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order)
  • नैतिकता (Morality)
  • स्वास्थ्य (Health)
  • अन्य मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु

न्यायिक निर्णय:

  • Rev. Stainislaus v. State of M.P. (1977): “Propagation” का अर्थ “Conversion” (धर्म परिवर्तन) नहीं है।
  • Bijoe Emmanuel v. State of Kerala (1986): “राष्ट्रीय गीत गाने से इंकार” धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है।
  • Ismail Faruqui Case (1994): धार्मिक स्थल राज्य नियंत्रण में आ सकते हैं।

अनुच्छेद 26 – धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय (Religious Denomination) को निम्न स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है —

  1. धार्मिक और धर्मार्थ (Charitable) कार्यों का संचालन करने की स्वतंत्रता।
  2. अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता।
  3. धर्मार्थ संपत्ति अर्जित करने और संचालित करने की स्वतंत्रता।
  4. संस्थाओं की संपत्ति का प्रशासन अपने अनुसार करने की स्वतंत्रता।

शर्तें:

  • यह अधिकार केवल नागरिकों के समूहों या धार्मिक समुदायों को प्राप्त है।
  • राज्य केवल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर हस्तक्षेप कर सकता है।

न्यायिक निर्णय:

  • Shirur Mutt Case (1954): “Essential Religious Practices” की अवधारणा दी गई।
  • T.M.A. Pai Foundation v. State of Karnataka (2002): धार्मिक संस्थाएँ शिक्षा संस्थान चला सकती हैं।

अनुच्छेद 27 – धार्मिक करों से स्वतंत्रता (Freedom from Taxation for Promotion of a Religion)

किसी नागरिक को किसी ऐसे कर का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, जिसका उपयोग किसी विशेष धर्म के प्रचार या पालन हेतु किया जाए। राज्य धर्मनिरपेक्ष होने के कारण किसी धर्म विशेष के लिए कर नहीं लगा सकता।

उदाहरण:

  • सरकार “मंदिर निर्माण” या “मस्जिद रखरखाव” के लिए कर नहीं लगा सकती।
  • किन्तु धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों (जैसे – पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण) के लिए कर लिया जा सकता है।

न्यायिक निर्णय:

  • Commissioner, Hindu Religious Endowments v. Sri Lakshmindra Thirtha Swamiar (1954): राज्य धार्मिक संस्थाओं से कर नहीं वसूल सकता जब तक कि उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष न हो।

अनुच्छेद 28 – धार्मिक शिक्षा से संबंधित स्वतंत्रता

यह अनुच्छेद शिक्षा संस्थानों में धार्मिक शिक्षा और उपासना से संबंधित नियम निर्धारित करता है —

संस्थान का प्रकारधार्मिक शिक्षा / उपासना का प्रावधान
1. पूरी तरह से राज्य निधि से संचालितधार्मिक शिक्षा या उपासना की अनुमति नहीं।
2. राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त या अनुदान प्राप्तछात्र की इच्छा के बिना धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती।
3. निजी या धार्मिक संस्थानधार्मिक शिक्षा देने की स्वतंत्रता है।

न्यायिक व्याख्या:

  • Aruna Roy v. Union of India (2002): “मूल्य शिक्षा” (Value Education) धार्मिक शिक्षा नहीं मानी जाएगी।

भारत में धर्मनिरपेक्षता (Secularism in India)

  • भारतीय संविधान ने “धर्मनिरपेक्षता” को 42वें संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा।
  • राज्य सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करता है।
  • कोई “राज्य धर्म” (State Religion) नहीं है।
  • संविधान अनुच्छेद 25 से 28 के माध्यम से धर्म की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
  • यह *सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता (Positive Secularism)* की अवधारणा अपनाता है।

निष्कर्ष

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय लोकतंत्र का हृदय है। यह न केवल धार्मिक विविधता की रक्षा करता है बल्कि सामाजिक एकता और समानता को भी मजबूत करता है। भारत का धर्मनिरपेक्ष ढाँचा इस सिद्धांत पर आधारित है कि — “सभी धर्म समान हैं, और प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के पालन की पूर्ण स्वतंत्रता है।”


महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (30+ Questions & Answers)

Q1: धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार किन अनुच्छेदों में दिया गया है?
अनुच्छेद 25 से 28 तक।

Q2: अनुच्छेद 25 क्या प्रदान करता है?
धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार करने की स्वतंत्रता।

Q3: अनुच्छेद 26 किससे संबंधित है?
धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से।

Q4: अनुच्छेद 27 का विषय क्या है?
धार्मिक करों से मुक्ति।

Q5: अनुच्छेद 28 क्या कहता है?
राज्य-निधि प्राप्त शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।

Q6: “Propagation” का अर्थ क्या है?
अपने धर्म के विचारों का प्रसार करना, परंतु धर्म परिवर्तन नहीं।

Q7: क्या अनुच्छेद 25 नागरिकों और विदेशियों दोनों पर लागू होता है?
हाँ।

Q8: “धर्मनिरपेक्षता” शब्द संविधान में कब जोड़ा गया?
42वाँ संशोधन, 1976 द्वारा।

Q9: भारत किस प्रकार की धर्मनिरपेक्षता अपनाता है?
सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता (Positive Secularism)।

Q10: अनुच्छेद 26 किन समूहों पर लागू होता है?
धार्मिक संप्रदायों और संस्थाओं पर।

Q11: Rev. Stainislaus केस किससे संबंधित है?
धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध से।

Q12: Shirur Mutt केस में क्या सिद्धांत दिया गया?
Essential Religious Practices का।

Q13: अनुच्छेद 27 किसे निषिद्ध करता है?
किसी धर्म विशेष के प्रचार हेतु कर वसूलना।

Q14: अनुच्छेद 28(1) क्या कहता है?
राज्य-निधि प्राप्त संस्थान धार्मिक शिक्षा नहीं देंगे।

Q15: क्या राज्य धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण रख सकता है?
हाँ, सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता के आधार पर।

Q16: कौन-सा अनुच्छेद सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिकता को प्राथमिकता देता है?
अनुच्छेद 25।

Q17: क्या भारत में “राज्य धर्म” है?
नहीं, भारत धर्मनिरपेक्ष है।

Q18: कौन-से अनुच्छेद राज्य और धर्म को अलग करते हैं?
अनुच्छेद 25 से 28।

Q19: अनुच्छेद 26(c) का संबंध किससे है?
धर्मार्थ संपत्ति अर्जित करने से।

Q20: “Essential Religious Practices” का निर्णय कौन करता है?
सर्वोच्च न्यायालय।

Q21: “Bijoe Emmanuel Case” में क्या फैसला हुआ?
राष्ट्रीय गीत गाने से इंकार धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत मान्य।

Q22: अनुच्छेद 25 का दायरा किन तक सीमित नहीं है?
केवल नागरिकों तक नहीं, सभी व्यक्तियों तक।

Q23: कौन-सा अनुच्छेद कराधान और धर्म को अलग करता है?
अनुच्छेद 27।

Q24: अनुच्छेद 28(3) क्या कहता है?
छात्र की इच्छा के बिना धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती।

Q25: क्या धार्मिक संस्थान स्कूल या कॉलेज चला सकते हैं?
हाँ, अनुच्छेद 26 के तहत।

Q26: धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा भारत ने कहाँ से ली?
भारत की ऐतिहासिक परंपरा और पश्चिमी सिद्धांतों से।

Q27: धर्मनिरपेक्षता का भारतीय रूप क्या है?
“सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान।”

Q28: कौन-सा अनुच्छेद धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित प्रतिबंध बताता है?
अनुच्छेद 25(1)।

Q29: “राज्य का धर्म से कोई संबंध नहीं” — यह किस सिद्धांत से जुड़ा है?
Secularism (धर्मनिरपेक्षता)।

Q30: धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह धार्मिक विविधता, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।

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