राष्ट्रीय आपातकाल

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Last Updated: 10/11/2025

राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency - Article 352) | Indian Polity Notes in Hindi

राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency – Article 352)

भारतीय संविधान में आपातकालीन प्रावधान (Emergency Provisions) का उल्लेख भाग XVIII (Part XVIII) में किया गया है, जो अनुच्छेद 352 से 360 तक फैला हुआ है। राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के अंतर्गत घोषित किया जाता है जब भारत की सुरक्षा या उसकी किसी भाग की सुरक्षा को युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति से खतरा होता है।


राष्ट्रीय आपातकाल की परिभाषा

जब भारत की या उसके किसी भाग की सुरक्षा को खतरा होता है, तो राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत **राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency)** घोषित कर सकते हैं। यह आपातकाल केंद्र को राज्यों पर लगभग पूर्ण नियंत्रण दे देता है और संघीय ढाँचा लगभग एकात्मक स्वरूप धारण कर लेता है।


अनुच्छेद 352 के आधार

राष्ट्रीय आपातकाल तीन आधारों पर घोषित किया जा सकता है:

  • युद्ध (War): जब किसी विदेशी देश से वास्तविक युद्ध हो।
  • बाहरी आक्रमण (External Aggression): जब विदेशी खतरा या हमला हो लेकिन युद्ध घोषित न हुआ हो।
  • सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion): जब देश के भीतर हथियारबंद विद्रोह या हिंसा हो। (1978 के 44वें संशोधन द्वारा “आंतरिक अशांति” के स्थान पर यह शब्द जोड़ा गया)

घोषणा की प्रक्रिया (Procedure of Proclamation)

  • राष्ट्रपति, **मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह** पर आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
  • घोषणा संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत की जाती है।
  • लोकसभा और राज्यसभा, दोनों को इसे **एक माह के भीतर अनुमोदित (approved)** करना होता है।
  • एक बार अनुमोदन होने के बाद, यह **छः माह तक** प्रभावी रहता है।
  • हर छः माह के बाद इसे फिर से अनुमोदित किया जा सकता है।
  • लोकसभा के विशेष प्रस्ताव से कभी भी इसे **रद्द (Revoke)** किया जा सकता है।

आपातकाल की अवधि और समाप्ति

  • पहली मंजूरी के बाद आपातकाल 6 महीने तक चलता है।
  • हर 6 महीने पर संसद की स्वीकृति आवश्यक है।
  • लोकसभा में **बहुमत (Majority of Total Membership)** द्वारा इसे निरस्त किया जा सकता है।
  • 44वें संशोधन (1978) ने यह सुनिश्चित किया कि आपातकाल केवल लिखित मंत्रिपरिषद सलाह पर ही लगाया जा सके।

आपातकाल के दौरान केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव

  • केंद्र, राज्यों के कार्यों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेता है।
  • राज्यों के विषयों पर भी संसद कानून बना सकती है।
  • राज्यों की कार्यपालिका केंद्र के अधीन कार्य करने लगती है।
  • वित्तीय संसाधन केंद्र के नियंत्रण में चले जाते हैं।

आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों पर प्रभाव

  • अनुच्छेद 19 के अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं।
  • अनुच्छेद 20 और 21 (जीवन और स्वतंत्रता) को 44वें संशोधन द्वारा अपवाद बनाया गया — इन अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता।
  • राष्ट्रपति अनुच्छेद 359 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को स्थगित कर सकते हैं।

आपातकाल के प्रभाव

1️⃣ राजनीतिक प्रभाव

  • संघीय ढाँचा लगभग एकात्मक रूप ले लेता है।
  • राज्य सरकारों की स्वायत्तता सीमित हो जाती है।
  • केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन समाप्त हो जाता है।

2️⃣ आर्थिक प्रभाव

  • संसाधनों पर केंद्र का पूर्ण नियंत्रण हो जाता है।
  • केंद्र राज्यों के बजट और वित्तीय नीतियों को नियंत्रित करता है।

3️⃣ सामाजिक प्रभाव

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।
  • राजनीतिक विरोध को दबाया जा सकता है।

भारत में अब तक घोषित राष्ट्रीय आपातकाल

वर्ष कारण प्रधानमंत्री स्थिति
1962 चीन के साथ युद्ध जवाहरलाल नेहरू 1968 तक जारी
1971 पाकिस्तान के साथ युद्ध इंदिरा गांधी 1977 तक जारी
1975 आंतरिक अशांति (Internal Disturbance) इंदिरा गांधी 1977 में समाप्त

44वां संशोधन (1978) और आपातकाल

  • केवल लिखित मंत्रिपरिषद सलाह पर ही राष्ट्रपति आपातकाल घोषित कर सकता है।
  • “आंतरिक अशांति” शब्द हटाकर “सशस्त्र विद्रोह” जोड़ा गया।
  • मौलिक अधिकार 20 और 21 को सुरक्षित रखा गया।
  • लोकसभा द्वारा बहुमत से आपातकाल समाप्त किया जा सकता है।
  • आपातकाल के दौरान संसद की अवधि केवल 1 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।

आलोचनाएँ (Criticism)

  • केंद्र सरकार की शक्ति असाधारण रूप से बढ़ जाती है।
  • लोकतांत्रिक संस्थाएँ निष्क्रिय हो जाती हैं।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न होता है।
  • 1975 का आपातकाल लोकतंत्र के लिए “काला अध्याय” माना गया।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय आपातकाल भारतीय संविधान की **सुरक्षा वाल्व (Safety Valve)** है। यह देश की अखंडता की रक्षा करता है, लेकिन इसका प्रयोग अत्यंत सावधानीपूर्वक होना चाहिए। 1975 के अनुभव ने सिखाया कि लोकतंत्र की आत्मा **जन-स्वतंत्रता** है, और आपातकाल तभी लगाया जाना चाहिए जब देश की एकता सच में खतरे में हो।


40 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions & Answers)

Q1: राष्ट्रीय आपातकाल किस अनुच्छेद के तहत घोषित होता है?
अनुच्छेद 352।

Q2: कौन राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करता है?
भारत के राष्ट्रपति।

Q3: आपातकाल की घोषणा किस सलाह पर होती है?
मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह पर।

Q4: आपातकाल कितने कारणों से लगाया जा सकता है?
तीन – युद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह।

Q5: आपातकाल की अधिकतम अवधि क्या है?
हर 6 माह के बाद संसद की स्वीकृति से बढ़ाई जा सकती है।

Q6: आपातकाल की पहली बार घोषणा कब हुई?
1962 में चीन युद्ध के दौरान।

Q7: “आंतरिक अशांति” शब्द किस संशोधन से हटाया गया?
44वें संशोधन (1978)।

Q8: मौलिक अधिकारों का निलंबन किस अनुच्छेद के तहत होता है?
अनुच्छेद 358 और 359।

Q9: अनुच्छेद 20 और 21 को क्यों सुरक्षित रखा गया?
क्योंकि ये जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित हैं।

Q10: कौन-से वर्ष में सबसे विवादास्पद आपातकाल लागू हुआ?
1975 में।

Q11: 1975 के आपातकाल की घोषणा किसने की?
राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर।

Q12: राष्ट्रीय आपातकाल का सबसे लंबा काल कौन-सा था?
1971–1977 (6 वर्ष)।

Q13: आपातकाल के दौरान संसद की अवधि कितनी बढ़ाई जा सकती है?
एक वर्ष तक।

Q14: आपातकाल के दौरान कौन-सा अधिकार स्वतः निलंबित होता है?
अनुच्छेद 19 के अधिकार।

Q15: क्या राष्ट्रपति आपातकाल स्वयं समाप्त कर सकता है?
हाँ, किसी भी समय।

Q16: लोकसभा आपातकाल कैसे समाप्त कर सकती है?
साधारण बहुमत से विशेष प्रस्ताव पारित कर।

Q17: आपातकाल के दौरान राज्यसभा की भूमिका क्या होती है?
स्वीकृति देना।

Q18: क्या आपातकाल पूरे देश पर लागू हो सकता है?
हाँ, या किसी भाग पर भी।

Q19: 44वें संशोधन का उद्देश्य क्या था?
आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग रोकना।

Q20: आपातकाल में भारत का शासन कैसा हो जाता है?
एकात्मक (Unitary)।

Q21: आपातकाल के दौरान कौन-सा अनुच्छेद लागू नहीं होता?
Article 19।

Q22: 44वें संशोधन से पहले कौन-सा शब्द प्रयोग हुआ था?
"Internal Disturbance"।

Q23: क्या न्यायालय आपातकाल की समीक्षा कर सकता है?
हाँ, सीमित रूप से (केशवानंद भारती केस के बाद)।

Q24: क्या आपातकाल के दौरान चुनाव हो सकते हैं?
नहीं, सामान्यतः टाल दिए जाते हैं।

Q25: कौन-से अधिकार कभी निलंबित नहीं हो सकते?
Article 20 और 21।

Q26: क्या आपातकाल के दौरान संघीय ढाँचा बदल जाता है?
हाँ, एकात्मक रूप धारण करता है।

Q27: आपातकाल की घोषणा संसद में कितने दिनों में रखनी होती है?
एक महीने में।

Q28: क्या राष्ट्रपति आपातकाल की समीक्षा कर सकता है?
हाँ, सलाह पर।

Q29: 1975 के आपातकाल को क्या कहा गया?
भारत का “काला अध्याय”।

Q30: कौन-सा अनुच्छेद आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित है?
अनुच्छेद 352 से 360।

Q31: आपातकाल का मूल उद्देश्य क्या है?
देश की अखंडता और सुरक्षा की रक्षा।

Q32: क्या राज्य सरकारें आपातकाल के दौरान भंग हो जाती हैं?
नहीं, पर केंद्र के अधीन कार्य करती हैं।

Q33: क्या आपातकाल नागरिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता है?
हाँ, बहुत अधिक।

Q34: क्या संसद आपातकाल में किसी भी विषय पर कानून बना सकती है?
हाँ।

Q35: आपातकाल के दौरान केंद्र की प्रमुख शक्ति क्या है?
राज्यों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण।

Q36: किस संशोधन ने आपातकालीन शक्तियाँ सीमित कीं?
44वाँ संशोधन।

Q37: कौन-से अनुच्छेद के अंतर्गत अधिकार निलंबित होते हैं?
358 और 359।

Q38: क्या आपातकाल लोकसभा की अवधि बढ़ा सकता है?
हाँ, अधिकतम 1 वर्ष तक।

Q39: आपातकाल समाप्ति की शक्ति किसके पास है?
राष्ट्रपति और लोकसभा दोनों के पास।

Q40: राष्ट्रीय आपातकाल का भारतीय लोकतंत्र पर क्या प्रभाव हुआ?
केंद्र की शक्ति बढ़ी, राज्यों की स्वायत्तता घटी, नागरिक स्वतंत्रता सीमित हुई।

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