अंतरराज्यीय परिषद

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Last Updated: 10/11/2025

अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council) | Indian Polity Notes in Hindi

अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग, समन्वय और विवाद निवारण के लिए “अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council)” की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह परिषद भारत के संघीय ढाँचे का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अंग है, जो “सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)” को मजबूत करती है।


संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provision – Article 263)

अनुच्छेद 263 कहता है — “यदि राष्ट्रपति यह मानता है कि राज्यों के बीच विवाद या नीति मामलों में समन्वय के लिए कोई निकाय बनाना आवश्यक है, तो वह अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना कर सकता है।”

अनुच्छेद 263 के अनुसार परिषद के उद्देश्य:

  • राज्यों के बीच विवादों की जांच और सलाह देना।
  • केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत समन्वय सुनिश्चित करना।
  • सामान्य हित के विषयों पर चर्चा और सिफारिश करना।

अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना

  • संविधान में परिषद की स्थापना का प्रावधान तो था, पर इसे वास्तव में 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार ने स्थापित किया।
  • इसकी सिफारिश सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission, 1983–87) ने की थी।
  • परिषद एक स्थायी संस्थान (Permanent Constitutional Body) नहीं, बल्कि राष्ट्रपति द्वारा आवश्यकतानुसार गठित की जाने वाली संस्था है।

परिषद की संरचना (Composition of Inter-State Council)

  • अध्यक्ष (Chairman): भारत के प्रधानमंत्री।
  • सदस्य: सभी राज्यपाल और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासक।
  • केंद्रीय मंत्री: कुछ वरिष्ठ मंत्री सदस्य के रूप में नामित।
  • स्थायी आमंत्रित: कुछ विशिष्ट केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के सदस्य।
  • सचिवालय: आंतरिक मामलों का मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) परिषद के कार्यों का संचालन करता है।

परिषद के मुख्य कार्य (Functions of Inter-State Council)

  • राज्यों और केंद्र के बीच विवादों की जांच और समाधान के लिए सिफारिश देना।
  • राज्यों के बीच नीति, प्रशासन और कानून के मामलों में समन्वय स्थापित करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों की गतिविधियों में समरसता बढ़ाना।
  • संविधानिक प्रावधानों या नीतियों के सुधार हेतु सिफारिशें देना।
  • राज्यों के बीच संसाधनों के वितरण और योजनाओं पर परामर्श देना।

सरकारिया आयोग की सिफारिशें (Sarkaria Commission Recommendations)

  • अंतरराज्यीय परिषद को एक **स्थायी संवैधानिक संस्था** का दर्जा दिया जाना चाहिए।
  • यह परिषद हर **तीन वर्ष में कम से कम दो बार** बैठक करे।
  • केंद्र और राज्यों के बीच नीति निर्माण, प्रशासन और योजना में इसका परामर्श लिया जाए।
  • राज्यों के वित्तीय मामलों पर भी परिषद का मत आवश्यक हो।

पंची आयोग (Punchhi Commission, 2007–2010) की सिफारिशें

  • अंतरराज्यीय परिषद को नियमित और सक्रिय मंच के रूप में विकसित किया जाए।
  • परिषद का सचिवालय स्वतंत्र हो और इसे स्थायी संस्थान बनाया जाए।
  • केंद्र-राज्य विवादों पर यह पहला समाधान मंच बने।
  • राज्यपालों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व में सुधार की सिफारिश।

अंतरराज्यीय परिषद की उप-परिषदें (Standing Committees)

  • 1996 में एक **Standing Committee** बनाई गई थी, जिसके अध्यक्ष गृहमंत्री होते हैं।
  • यह परिषद की बैठकों के बीच कार्यों की निगरानी और सिफारिशों के अनुपालन की समीक्षा करती है।

बैठकें और कार्यप्रणाली

  • पहली बैठक — 10 अक्टूबर 1990
  • अब तक (2025 तक) कुल 12 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
  • बैठकों में नीति आयोग, गृह मंत्रालय, और राज्यों के मुख्य सचिव भाग लेते हैं।
  • विषय: कृषि सुधार, शिक्षा नीति, वित्तीय वितरण, कानून व्यवस्था, आपसी सहयोग।

अंतरराज्यीय परिषद का महत्व

  • यह **केंद्र और राज्यों के बीच संवाद (Dialogue Mechanism)** का सबसे प्रमुख संवैधानिक माध्यम है।
  • सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करती है।
  • विवादों को कानूनी विवाद बनने से पहले ही निवारण का मंच प्रदान करती है।
  • नीति आयोग और अन्य संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाती है।

अंतरराज्यीय परिषद बनाम नीति आयोग

आधारअंतरराज्यीय परिषदनीति आयोग
स्वरूपसंवैधानिक निकाय (Article 263)गैर-संवैधानिक, कार्यकारी निकाय
स्थापना1990 में2015 में
मुख्य उद्देश्यकेंद्र-राज्य विवादों का समाधानविकास नीति में सहयोग
अध्यक्षप्रधानमंत्रीप्रधानमंत्री
कार्यनीति समन्वय, विवाद समाधानविकास योजनाएँ और आर्थिक सहयोग

चुनौतियाँ (Challenges)

  • बैठकों का नियमित रूप से न होना।
  • सिफारिशों पर पर्याप्त अनुपालन का अभाव।
  • केंद्र की प्रमुखता के कारण राज्यों की चिंताओं की उपेक्षा।
  • स्वतंत्र सचिवालय का अभाव।

निष्कर्ष

अंतरराज्यीय परिषद भारत के संघीय ढाँचे की **संविधानिक आत्मा (Spirit of Federalism)** का प्रतीक है। यह न केवल केंद्र और राज्यों के बीच विवादों को हल करती है बल्कि आपसी सहयोग और नीति समरसता को भी बढ़ाती है। यदि इसे नियमित रूप से सक्रिय किया जाए, तो यह भारतीय लोकतंत्र को और भी मजबूत बना सकती है।


35 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions & Answers)

Q1: अंतरराज्यीय परिषद का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 263 में।

Q2: अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना कब हुई?
1990 में।

Q3: इसका अध्यक्ष कौन होता है?
भारत का प्रधानमंत्री।

Q4: परिषद के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
विवाद समाधान, नीति समन्वय, और सलाह देना।

Q5: अंतरराज्यीय परिषद की सिफारिश किस आयोग ने की थी?
सरकारिया आयोग (1983–1987)।

Q6: पंची आयोग ने क्या सिफारिश की थी?
इसे नियमित और स्थायी संस्था बनाने की।

Q7: परिषद के कार्य किस मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं?
गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs)।

Q8: पहली बैठक कब हुई थी?
10 अक्टूबर 1990।

Q9: Standing Committee की अध्यक्षता कौन करता है?
गृहमंत्री।

Q10: परिषद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय।

Q11: क्या परिषद की सिफारिशें बाध्यकारी हैं?
नहीं, केवल सलाहकारी हैं।

Q12: परिषद की संरचना में कौन शामिल हैं?
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र मंत्री, और राज्यपाल।

Q13: क्या यह एक स्थायी निकाय है?
नहीं, राष्ट्रपति द्वारा गठित अस्थायी निकाय है।

Q14: परिषद किस प्रकार का निकाय है?
संवैधानिक सलाहकारी निकाय।

Q15: नीति आयोग से अंतर क्या है?
परिषद विवाद समाधान करती है, नीति आयोग विकास नीति बनाता है।

Q16: अनुच्छेद 263 का स्वरूप कैसा है?
सक्षमकारी (Enabling) — बाध्यकारी नहीं।

Q17: परिषद के अध्यक्ष के अलावा कौन सदस्य होते हैं?
सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रमुख।

Q18: Standing Committee की भूमिका क्या है?
परिषद की सिफारिशों की निगरानी।

Q19: परिषद का सचिवालय कहाँ स्थित है?
नई दिल्ली (गृह मंत्रालय)।

Q20: क्या अंतरराज्यीय परिषद का गठन स्वतः होता है?
नहीं, राष्ट्रपति के आदेश से।

Q21: परिषद के कार्यों की समीक्षा कितनी बार होनी चाहिए?
कम से कम हर तीन वर्ष में।

Q22: अंतरराज्यीय परिषद संघीय ढाँचे को कैसे मजबूत करती है?
संवाद, सहयोग, और नीति समन्वय द्वारा।

Q23: परिषद की रिपोर्ट किसे सौंपी जाती है?
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को।

Q24: सरकारिया आयोग का गठन कब हुआ?
1983 में।

Q25: क्या परिषद के पास न्यायिक शक्ति है?
नहीं, केवल सलाहकार भूमिका।

Q26: पंची आयोग का गठन कब हुआ?
2007 में।

Q27: पंची आयोग ने कौन-सा सुधार सुझाया?
स्वतंत्र सचिवालय और नियमित बैठकें।

Q28: परिषद कितनी बार बैठक कर चुकी है?
लगभग 12 बार (2025 तक)।

Q29: परिषद की सदस्यता किनके लिए खुली है?
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के लिए।

Q30: अंतरराज्यीय परिषद किस प्रकार की संस्था है?
संवैधानिक लेकिन गैर-स्थायी।

Q31: परिषद की भूमिका क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 263 के उद्देश्यों की पूर्ति।

Q32: क्या परिषद नीति आयोग का स्थान लेती है?
नहीं, दोनों के कार्य अलग हैं।

Q33: अंतरराज्यीय परिषद का मुख्य सिद्धांत?
सहकारी संघवाद।

Q34: परिषद के गठन का आदेश कौन जारी करता है?
राष्ट्रपति।

Q35: परिषद की पहली सिफारिशें किस विषय पर थीं?
केंद्र-राज्य सहयोग और नीति समन्वय।

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