भारतीय दर्शन एवं प्रमुख तर्कशास्त्रीय विद्यालय

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Last Updated: 30/10/2025

भारतीय दर्शन एवं प्रमुख तर्कशास्त्रीय विद्यालय | Indian Philosophy Notes

भारतीय दर्शन एवं प्रमुख तर्कशास्त्रीय विद्यालय (Philosophy & Major Schools of Thought)

भारतीय दर्शन शास्त्र में छह प्रमुख ऑर्थोडॉक्स (आस्तिक) दर्शनशास्त्र के स्कूल माने जाते हैं जिन्हें षडदर्शन कहा जाता है। इनमें न्याय, सांख्य, योग, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत प्रमुख हैं। ये विद्यालय तर्क, आध्यात्मिकता और ज्ञान के आधार पर मानव जीवन के अर्थ की खोज करते हैं।

1. न्याय दर्शन (Nyaya Philosophy)

  • संस्थापक: गौतम ऋषि (लगभग 2री सदी ईसा पूर्व)।
  • प्रमुख ग्रंथ: न्यायसूत्र।
  • मुख्य विषय: तर्कशास्त्र, ज्ञानमीमांसा और प्रमाण।
  • प्रमाण के चार साधन – प्रत्यक्ष (दृष्टि), अनुमाान (Inference), उपमाण (Comparison), और शाब्द (Verbal testimony)।
  • ज्ञान की प्राप्ति से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
  • परमपिता के अस्तित्व को तर्कसंगत सिद्ध करना।

2. योग दर्शन (Yoga Philosophy)

  • संस्थापक: पतंजलि मुनि (लगभग 2री सदी ईसा पूर्व)।
  • प्रमुख ग्रंथ: योगसूत्र।
  • मूल उद्देश्य: मानसिक शांति, आत्म-साक्षात्कार, और मोक्ष।
  • अष्टांग योग – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।
  • योग शरीर और मन के समन्वय हेतु उपाय है।

3. वेदांत दर्शन (Vedanta Philosophy)

  • आधार: उपनिषदों का ज्ञान।
  • प्रमुख शाखाएं: अद्वैत वेदांत (शंकराचार्य), द्वैत वेदांत (मध्वाचार्य), विषिष्टाद्वैत (रामानुजाचार्य)।
  • अद्वैत वेदांत में 'ब्रह्म' और 'आत्मा' के एकरूपता को मान्यता।
  • मोक्ष के लिए ज्ञान और भक्ति का संगम आवश्यक।

4. अन्य प्रमुख दर्शनशास्त्रीय विद्यालय

  • सांख्य: प्रकृति और पुरुष के द्वैत सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध।
  • मीमांसा: वेदों के अनुष्ठानों और कर्मकांडों के ज्ञान की व्याख्या।
  • वैशेषिक: पदार्थ और उसकी प्रकृति की वैज्ञानिक व्याख्या।

महत्वपूर्ण तथ्य सारणी

दर्शनसंस्थापकप्रमुख ग्रंथमुख्य विषय
न्यायगौतमन्यायसूत्रतर्क, ज्ञानमीमांसा, मोक्ष साधन
योगपतंजलियोगसूत्रआत्मिक शांति, अष्टांग योग
वेदांतशंकराचार्य, रामानुज, मध्वउपनिषद, भगवद्गीताब्रह्मज्ञान, मोक्ष
सांख्यइष्टकसांख्यकारिकाप्रकृति-पुरुष द्वैत
मीमांसाजिमूतवाहनमीमांसा सूत्रकर्मकांड, वेदसम्मता
वैशेषिककणादवैशेषिक सूत्रपदार्थ और गुणों का अध्ययन

25+ परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)

  1. न्याय दर्शन के संस्थापक कौन थे?
    — गौतम।
  2. न्याय दर्शन में ज्ञान के कितने स्रोत माने गए हैं?
    — चार (प्रत्यक्ष, अनुमाान, उपमाण, शाब्द)।
  3. योग दर्शन का प्रमुख ग्रंथ कौन सा है?
    — योगसूत्र (पतंजलि)।
  4. अष्टांग योग के कितने अंग होते हैं?
    — आठ।
  5. अद्वैत वेदांत के संस्थापक किसे माना जाता है?
    — शंकराचार्य।
  6. वेदांत दर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    — मोक्ष और ब्रह्मज्ञान।
  7. सांख्य दर्शन किस सिद्धांत पर आधारित है?
    — प्रकृति और पुरुष का द्वैत।
  8. मीमांसा दर्शन का मुख्य विषय क्या है?
    — वेदों की पूजा व्यवस्था और कर्मकांड।
  9. वैशेषिक दर्शन किस विषय का अध्ययन करता है?
    — पदार्थों के गुण और उनका वर्गीकरण।
  10. न्याय दर्शन में मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?
    — सही ज्ञान और तर्क द्वारा।
  11. योग दर्शन में समाधि का क्या अर्थ है?
    — ध्यान की अंतिम अवस्था।
  12. न्याय और वैशेषिक दर्शन के बीच क्या संबंध है?
    — दोनों दर्शनशास्त्र अक्सर साथ पढ़ाए जाते हैं और एक-दूसरे को पूरक समझे जाते हैं।
  13. योग दर्शन किसे आत्मा मानता है?
    — जीवात्मा।
  14. वेदांत दर्शन में ‘माया’ का क्या अर्थ है?
    — संसार की मिथ्या और भ्रमित प्रकृति।
  15. सांख्य दर्शन में ‘पुरुष’ किसे कहते हैं?
    — शुद्ध चेतना या आत्मा को।
  16. मीमांसा के अनुसार कार्य क्यों आवश्यक हैं?
    — धर्म पालन के लिए।
  17. वेदांत दर्शन में ‘ब्रह्म’ क्या है?
    — परम वास्तविकता, सर्वव्यापी।
  18. योग दर्शन का प्रमुख सिद्धांत क्या है?
    — मन और शरीर का संयोजन और नियंत्रण।
  19. न्याय दर्शन में ‘प्रमाण’ का अर्थ क्या है?
    — ज्ञान का सही स्रोत।
  20. योग दर्शन के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
    — मानसिक शांति, आत्मा की मुक्ति, समाधि।
  21. अद्वैत वेदांत के अनुसार, आत्मा और ब्रह्म कैसे हैं?
    — एक ही।
  22. वैशेषिक दर्शन का केंद्रीय सिद्धांत क्या है?
    — पदार्थों की तत्वात्मक प्रकृति।
  23. न्याय दर्शन की प्रमुख विधि क्या है?
    — तर्क और आलोचनात्मक सोच।
  24. सांख्य दर्शन के कितने प्रकार के तत्व माने गए हैं?
    — 25 तत्व।

निष्कर्ष

भारतीय दार्शनिक परंपरा विश्व की प्राचीनतम और गहनतम है। न्याय, योग और वेदांत जैसी प्रमुख दार्शनिक प्रणालियों ने न केवल आध्यात्मिक ज्ञान दिया बल्कि तर्क, न्याय, प्रकृति और मानव जीवन की गूढ़ समझ भी प्रदान की।

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