संगम युग

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Last Updated: 30/10/2025

संगम युग (Sangam Age) — Ancient India GK Notes

संगम युग (Sangam Age)

संगम युग प्राचीन दक्षिण भारत का वह ऐतिहासिक काल है, जब तमिल क्षेत्र (मूलतः तमिलनाडु व केरल) में अत्यंत समृद्ध साहित्य, संस्कृति, समाज और राजनीतिक संगठनों का विकास हुआ। "संगम" का अर्थ - विद्वानों की सभा। इस कालक्रम में अधिकांश साहित्यिक कृतियाँ संगम सभाओं (संस्थाओं) के अंतर्गत रचित हुईं।

काल सीमा एवं महत्व

  • संगम युग की अवधि – लगभग 300 ई.पू. से 300 ई. (कुछ इतिहासकार 600 ई.पू. से 300 ई. तक मानते हैं)
  • तमिल साहित्य व संस्कृति का स्वर्ण युग; ‘तमिल क्लासिकल युग’
  • प्राचीन दक्षिण भारत (तमिलकम) का वास्तविक इतिहास समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण।

संगम सभाएँ एवं साहित्य

  • तीन प्रमुख संगम सभाएं मानी जाती हैं:
    1. प्रथम संगम: मदुरै - कोई ग्रंथ उपलब्ध नहीं।
    2. द्वितीय संगम: काप्तपुरम - अधूरे ग्रंथ बचे।
    3. तृतीय संगम: मदुरै - सर्वाधिक साहित्यिक कृतियां इसी काल में (टोळकाप्पियम, एट्टुतोकाई, पट्टुपाट्टू, शिलप्पदिकारम् आदि)।
  • संगम साहित्य – नैतिक, सामाजिक, प्रेम, युद्ध, राजनीति, प्रकृति, धर्म आदि विषयों पर।
  • साहित्य की प्रमुख रचनाएँ – टोळकाप्पियम (व्याकरण), एट्टुतोकाई (आठ संकलन), पट्टुपाट्टू (दस गाथाएँ), शिलप्पदिकारम्, मणिमेखलै
  • कवियों की उपाधि – पुलावर, कवि

राजनीतिक स्थिति

  • तीन महाजन्य राजवंश (मूवर): चोल, चेर, पांड्य
  • अन्य क्षेत्रीय सरदार: आय, सातवन, अत्तियार, इरुवेल, मुत्तरियार
  • राजा/किंग – प्रमुख न्यायपालिका, सेना, भूमि, कर, वर्ण व्यवस्था
  • राजधानी: चोल (उरैयूर, पोहर), चेर (वान्जी), पांड्य (मदुरै)
  • श्रेष्ठ समुद्री युद्ध व व्यापार सामर्थ्य

प्रमुख राजवंश सम्बंधित जानकारी

राजवंश राजधानी महत्त्वपूर्ण शासक विशेषता
चोल उरैयूर, पोहर करिकाल चोल सिंचाई, समुद्री व्यापार, युद्ध शक्ति
चेर वान्जी/करूर उदयंगुरु, इमयावरंभन चेरल कालीकट बंदरगाह, मसालों का निर्यात
पांड्य मदुरै नाण्मरन, नडुनजेलियन मुक्त व्यापार, मोतियों का निर्यात

समाज एवं संस्कृति

  • समाज – जनजाती, कुल (कुटुम्ब), गाँव, गण व व्यापारिक संगठन
  • मातृसत्तात्मक (विशेषतः चेर-पांड्य क्षेत्रों में), स्त्रियों को सामाजिक सम्मान
  • वर्ण व्यवस्था नहीं; जन्म और कर्म-आधारित वर्णन
  • शिक्षा, साहित्य, कला – जोरदार उन्नति; वाद्ययंत्र, चित्रकला, नृत्य
  • तमिल भाषा व साहित्य का क्लासिक उत्कर्ष

अर्थव्यवस्था

  • कृषि – धान, गन्ना, मसाले
  • व्यापार – स्थल (जाति, काफिला, नगर) एवं समुद्री (रोमन साम्राज्य, सीलोन, दक्षिण-पूर्व एशिया)
  • न्याय व्यवस्था, कर (भूमि कर, आयात-निर्यात टैक्स)
  • सोना, चांदी की मुद्रा
  • मसालों, मोतियों, हाथी दाँत, सूती वस्त्रों का निर्यात

धर्म व धार्मिक आंदोलन

  • प्राकृतिक देवता (मुरुगन, इंद्र, वरुण, कुबेर); वृक्ष, पर्वत पूजन
  • तमिल द्रविड़ देवी-देवता—कली, काव्या, कोरावाई, पोट्री
  • बौद्ध एवं जैन धर्म का प्रभाव; संगम साहित्य में धार्मिक सहिष्णुता

कला, वास्तुकला व संगीत

  • धातु कला (मूर्ति कला), रासमी नृत्य, संगीत का तेज विकास
  • मंदिर, मूर्तियाँ, चित्रकला—शुरुआती शैली, विशेष तमिल परंपरा

महत्त्वपूर्ण तथ्य सारांश

अवधि300 BCE – 300 CE
मेगास्थनीज के समकालीन शासकचंद्रगुप्त मौर्य, दक्षिण भारत के तीन राजवंश
प्रमुख साहित्यटोळकाप्पियम, एट्टुतोकाई, पट्टुपाट्टू, शिलप्पदिकारम्
राजनायककरिकाल चोल, इमयावरंभन चेरल, नडुनजेलियन पांड्य
धार्मिक परंपराद्रविड़, बौद्ध, जैन
मुद्रा/निर्यातसोना, मसाले, मोती, हाथी दाँत

25+ परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)

  1. संगम काल किस क्षेत्र का है?
    — तमिलकम/दक्षिण भारत
  2. संगम शब्द का अर्थ?
    — विद्वान, कवियों की सभा
  3. त्यामिल भाषा में संगम साहित्य क्यों महत्वपूर्ण है?
    — यह प्राचीनतम उपलब्ध द्रविड़ साहित्य है
  4. संगम युग में प्रमुख राजवंश कौन-से हैं?
    — चोल, चेर, पांड्य
  5. संगम सभाओं की कुल संख्या?
    — तीन (मदुरै/काप्तपुरम आधारित)
  6. टोळकाप्पियम किस विषय पर है?
    — व्याकरण और साहित्य
  7. करिकाल किस राजवंश का महान शासक था?
    — चोल
  8. शिलप्पदिकारम् किसका महाकाव्य है?
    — इलंगो आदिगल
  9. संगम युग का कालक्रम क्या है?
    — 300 ईसा पूर्व – 300 ईस्वी
  10. महिलाओं की क्या स्थिति थी?
    — समाज में सम्मान, स्वतंत्रता
  11. संगम काल में किस देवता की पूजा अधिक होती थी?
    — मुरुगन
  12. तमिल नाडु और केरल में कौन-सी उपयुक्त नदियाँ हैं?
    — कावेरी, वैगई, पेरियार
  13. प्रसिद्ध बंदरगाह कौन-से थे?
    — कावेरीपत्तनम, कालीकट, मुज़िरीस
  14. प्रसिद्ध संगम कवि?
    — अव्वैयार, इडैयन, नक्कीरन
  15. बौद्ध, जैन धर्म का प्रभाव कैसा था?
    — उच्च स्तर
  16. व्यापारिक वस्तुएँ?
    — मसाले, मोती, कपड़ा, हाथी दाँत
  17. राजा को सर्वोच्च क्या मानते थे?
    — न्यायाधीश और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी
  18. तमिल संगमों का संबंध किस नगर से है?
    — मदुरै
  19. संगम काल का सबसे बड़ा धार्मिक परिवर्तन?
    — सामाजिक समरसता, धर्मों की सहिष्णुता
  20. मान्य मौर्य सम्राट के समकालीन कौन-से संगम शासक थे?
    — चोल, चेर, पांड्य
  21. व्यापारिक गतिविधि किस समुद्र से होती थी?
    — अरब सागर, बंगाल की खाड़ी
  22. संगम साहित्य की भाषा?
    — तमिल
  23. जाति-प्रथा कैसी थी?
    — वर्ण व्यवस्था सीमित, अधिकतर कर्म आधारित
  24. प्रमुख संगम स्त्रियाँ?
    — अव्वैयार (कवयित्री)
  25. शिलप्पदिकारम् का कथानायक?
    — कन्नगी

निष्कर्ष

संगम काल दक्षिण भारत का सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं राजनैतिक उत्कर्ष था, जिसकी विविधता एवं समावेशिता ने तमिल सभ्यता को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।

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