रक्षा प्रौद्योगिकी — भारत (2024–25 / 2025)
Quick summary — मुख्य बिंदु
- Defence Procurement Manual (DPM) 2025 ने खरीद प्रक्रियाओं को सरल कर निजी और छोटे निर्माताओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
- DRDO ने हाइपरसोनिक और scramjet प्रौद्योगिकी में परीक्षण किए — HSTDV जैसे कार्यक्रम निर्णायक हैं।
- BrahMos परिवार, BrahMos‑II (हाइपरसोनिक विकास) तथा LRAShM जैसी परियोजनाएँ गतिशील रक्षा‑तकनीक पर काम कर रही हैं।
- सरकार ने rare‑earth permanent magnets के घरेलू निर्माण हेतु योजना को मंजूरी दी — यह रक्षा‑सप्लाई‑शृंखला के लिये रणनीतिक है।
- रक्षा निर्यात और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलने से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
विस्तृत नोट्स
1. नीतिगत परिवेश और DPM 2025
DPM 2025 का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित और निजी‑उद्योग‑हितैषी बनाना है। इसका लक्ष्य MSMEs तथा रक्षा‑स्टार्ट‑अप्स को तेज़ी से अवसर देना और indigenisation को बढ़ाना है।
2. DRDO — प्रमुख तकनीकें और परियोजनाएँ
DRDO हाइपरसोनिक, एयर‑डोमेन एरोनॉटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, काइबर‑रिजिलिएंस और मिसाइल‑प्रणालियों में सक्रिय है। HSTDV के scramjet परीक्षण हाइपरसोनिक‑क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
3. मिसाइल‑प्रोग्राम्स और नई परियोजनाएँ
- BrahMos परिवार — भारत‑रूस संयुक्त परियोजना; supersonic cruise missile के रूप में प्रमुख सफलता।
- BrahMos‑II — हाइपरसोनिक वैरिएंट पर विकास‑कामी; प्रायोगिक/विकासात्मक चरण में।
- LRAShM — लंबी‑श्रेणी anti‑ship/maritime strike क्षमता हेतु योजनाएँ।
- नए NLOS, precision‑guided munitions और anti‑drone प्रणालियों पर भी कार्य जारी है।
4. एयर और समुद्री तकनीक
वायुसेना और नौसेना के लिये advanced fighters, maritime patrol aircraft, आधुनिक पनडुब्बी तथा ASW क्षमताओं पर निवेश बढ़ा है। लोक‑निजी भागीदारी और अपग्रेड अनुबंधों से क्षमताएँ मजबूत हो रही हैं।
5. रक्षा‑उद्योग और विनिर्माण पहलें
सरकार ने रक्षा‑निर्माण को बढ़ावा देने हेतु incentives, single‑window approvals और export‑promotion उपाय जारी किये हैं। InvestIndia जैसी प्लेटफार्मों पर रक्षा‑निर्यात को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
6. आपूर्ति‑श्रृंखला और सामग्रियाँ
आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिये rare‑earth permanent magnets, विशेष मिश्रधातुएँ और उन्नत सेमीकंडक्टर्स आवश्यक हैं। REPM‑निर्माण योजना से घरेलू आपूर्ति‑क्षमता बढ़ेगी और निर्भरता घटेगी।
7. कूटनीतिक और रणनीतिक आयाम
आत्मनिर्भर रक्षा से रणनीतिक स्वतन्त्रता बढ़ती है, पर तकनीकी सहयोग व co‑development के माध्यम से तीव्र प्रौद्योगिकी पहुंच भी आवश्यक है। भारत ने कई देशों के साथ रक्षा सहयोग समझौते किए हैं।
8. चुनौतियाँ (Exam‑ready बिंदु)
- हाइपरसोनिक हथियारों से arms‑race और strategic instability का जोखिम।
- स्ट्रैटेजिक सप्लाई‑चेन में आत्मनिर्भरता स्थापित करना (rare materials, semiconductors)।
- R&D‑intensive contracts और private sector के लिए प्रमाणन‑प्रक्रियाएँ चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
- Export controls और वैश्विक लाइसेंसिंग प्रतिबंधों का प्रबंधन आवश्यक है।
2024–25 / 2025 के महत्वपूर्ण अपडेट (संक्षेप)
- DPM 2025 — खरीद प्रक्रियाओं का सरलीकरण और indigenisation को प्रोत्साहन।
- DRDO हाइपरसोनिक परीक्षण — HSTDV एवं संबंधित प्रदर्शन।
- REPM योजना — rare‑earth permanent magnets के लिये घरेलू निर्माण को मंजूरी (Nov 26, 2025)।
- रक्षा निर्यात और निवेश — निर्यात वृद्धि और निवेश‑प्रोत्साहन गतिविधियाँ।
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